एल नीनो और ला नीना के प्रभाव से 2025 की सर्दी होगी अब तक की सबसे ठंडी सर्दियों में से एक।
एल नीनो और ला नीना: दुनिया इस समय एक बड़े जलवायु परिवर्तन (Climate Transition) के दौर से गुजर रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 2025 की सर्दी पिछले 110 वर्षों में तीसरी सबसे ठंडी सर्दी हो सकती है।
इस परिवर्तन के पीछे दो मुख्य जलवायु घटनाएँ हैं — एल नीनो (El Niño) और ला नीना (La Niña)।
इन दोनों का असर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है।
एल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के तापमान में बदलाव से जुड़ी दो विपरीत जलवायु घटनाएँ हैं।
ये दोनों El Niño–Southern Oscillation (ENSO) चक्र का हिस्सा हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 2024 के दौरान एल नीनो अपने चरम पर था, जिसके कारण भारत में मानसून कमजोर रहा और कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहा।
लेकिन अब, प्रशांत महासागर तेजी से ठंडा हो रहा है, जो इस बात का संकेत है कि ला नीना की स्थिति मजबूत हो रही है।
यह बदलाव सीधा असर डालता है:
यही कारण है कि 2025 की सर्दी बेहद ठंडी, लंबी और अप्रत्याशित मानी जा रही है।
भारत में मौसम सीधे तौर पर प्रशांत महासागर के तापमान से जुड़ा है।
जब एल नीनो सक्रिय होता है, तो भारत में आमतौर पर गर्मी और सूखा देखा जाता है,
लेकिन जब ला नीना आता है, तो ठंड और बारिश दोनों बढ़ जाती हैं।
मौसम विभागों की रिपोर्ट्स के अनुसार:
इसलिए, यह सर्दी केवल “ठंडी” नहीं बल्कि कठोर और लंबी होगी।
लोग अक्सर सर्दियों में बर्फ देखने के लिए पहाड़ों की ओर निकल पड़ते हैं, लेकिन ला नीना के दौरान पहाड़ी यात्रा बहुत जोखिमभरी हो जाती है।
इसलिए, सरकार और पर्यटन विभाग लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि
👉 “केवल पूरी तैयारी के साथ ही पहाड़ी इलाकों में यात्रा करें।”
ला नीना से प्रभावित सर्दी में यात्रा के लिए आपको सामान्य कपड़ों से काम नहीं चलेगा।
यहाँ कुछ आवश्यक तैयारियाँ दी गई हैं:
साथ ही, स्थानीय मौसम विभाग के अलर्ट और रोड कंडीशन लगातार चेक करते रहें।
ला नीना का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि ला नीना वैश्विक स्तर पर जलवायु संतुलन को बदल रहा है।
जी हाँ, विशेषज्ञ मानते हैं कि एल नीनो और ला नीना की तीव्रता अब पहले से अधिक बढ़ रही है,
जो यह संकेत देता है कि पृथ्वी का जलवायु तंत्र अस्थिर हो रहा है।
इसलिए, 2025 की कड़ाके की सर्दी केवल एक मौसमीय घटना नहीं,
बल्कि मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन का चेतावनी संकेत है।
2025 की सर्दी केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक परीक्षा है।
ला नीना के कारण आने वाली ठंड हमें यह याद दिलाती है कि
प्रकृति हमेशा शक्तिशाली है और हमें उसके साथ तालमेल बैठाना होगा।
इस सर्दी:
“यात्रा समझदारी से करें,
तैयारी पूरी रखें,
और प्रकृति का सम्मान करें।”
एल नीनो में प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ता है, जिससे गर्मी और सूखा बढ़ता है।
ला नीना में तापमान घटता है, जिससे ठंड और वर्षा बढ़ती है।
हाँ, मौसम विभाग के अनुसार हिमालयी इलाकों में औसत से ज्यादा बर्फबारी और लंबी सर्दी की संभावना है।
नहीं, यह हर 2–7 साल में एक बार आता है और 9–12 महीने तक सक्रिय रह सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण इनकी तीव्रता और असर दोनों बढ़ रहे हैं।
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