भारत ने न्यूयॉर्क में जगाई नवाचार की रोशनी! 🇮🇳✨ एलईडी लाइट के ज़रिए डेटा ट्रांसमिशन करने वाली LiFi तकनीक के साथ भारत ने अमेरिका में कनेक्टिविटी का नया युग शुरू किया।"
भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का निर्माता और वैश्विक लीडर भी बन सकता है।
गुजरात की एक भारतीय कंपनी — Nav Wireless Technologies — ने हाल ही में New York City में अमेरिका का पहला LiFi इंटरनेट सिस्टम इंस्टॉल किया है।
यह वही न्यूयॉर्क है जहाँ से कई टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पूरी दुनिया में फैलते हैं। अब वहाँ इंटरनेट Wi-Fi से नहीं बल्कि LED लाइट्स से चलेगा!
👉 यह ऐतिहासिक इंस्टॉलेशन न्यूयॉर्क के Silicon Harlem ऑफिस में हुआ। यह कदम भारत के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
Wi-Fi तो हम सभी जानते हैं — एक वायरलेस नेटवर्क जो रेडियो तरंगों के जरिए डाटा ट्रांसफर करता है।
लेकिन LiFi (Light Fidelity) इससे बिल्कुल अलग है। इसमें डाटा ट्रांसफर करने के लिए LED लाइट का उपयोग किया जाता है।
👉 सीधा मतलब — जहां लाइट पहुंचेगी, वहीं हाई-स्पीड इंटरनेट भी मिलेगा।
| विशेषता | Wi-Fi | LiFi |
|---|---|---|
| ट्रांसमिशन माध्यम | रेडियो वेव्स | LED लाइट (विजिबल लाइट) |
| स्पीड | औसत 100 Mbps तक | 1 Gbps से ज्यादा संभावित |
| सुरक्षा | दीवारों से पार होती है | लाइट सीमित क्षेत्र में रहती है |
| कवरेज | पूरे घर या ऑफिस में | जहाँ लाइट होगी वहीं सिग्नल होगा |
| इंटरफेरेंस | अन्य रेडियो सिग्नल से प्रभावित | EMI से सुरक्षित |
👉 यही वजह है कि कई विशेषज्ञ LiFi को इंटरनेट का भविष्य मानते हैं।
गुजरात की कंपनी Nav Wireless Technologies ने अक्टूबर 2025 में यह घोषणा की कि उन्होंने अमेरिका में पहला Commercial LiFi Internet System इंस्टॉल किया है।
📍 यह इंस्टॉलेशन न्यूयॉर्क के Silicon Harlem इनोवेशन हब में हुआ।
🤝 इसमें JESCO Venture Labs भी पार्टनर के रूप में शामिल रही।
कंपनी के CTO श्री हार्दिक सोनी ने कहा —
“यह भारत के लिए गर्व का क्षण है। अब हमारी LiFi टेक्नोलॉजी अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी प्रयोग में लाई जाएगी।”
Silicon Harlem, न्यूयॉर्क का एक प्रमुख इनोवेशन हब है जो नई तकनीकों को अपनाने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।
यहाँ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालय, और सरकार मिलकर नए प्रयोग करते हैं।
LiFi सिस्टम को यहाँ इंस्टॉल करने का मतलब है कि यह तकनीक अमेरिका में भी मुख्यधारा में आने की ओर कदम बढ़ा चुकी है।
LiFi में डेटा ट्रांसफर की गति Wi-Fi से कई गुना तेज हो सकती है। प्रयोगों में इसे 1 Gbps से भी अधिक पाया गया है।
चूंकि लाइट दीवारों को पार नहीं कर सकती, इसलिए कोई बाहरी व्यक्ति आसानी से नेटवर्क में घुस नहीं सकता। यह तकनीक सरकारी ऑफिस, बैंकिंग सेक्टर और मिलिट्री के लिए खासतौर पर फायदेमंद हो सकती है।
Wi-Fi में रेडियो तरंगों का इस्तेमाल होता है, जबकि LiFi में केवल लाइट का। इसलिए यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस से मुक्त है।
जहां Wi-Fi नेटवर्क ओवरलोड हो जाता है, वहां LiFi एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
LiFi की शुरुआत 2011 में प्रोफेसर Harald Haas ने की थी। उन्होंने सबसे पहले एक LED बल्ब के जरिए इंटरनेट ट्रांसमिट कर दिखाया था।
तब से लेकर आज तक कई देशों ने इस दिशा में शोध और विकास किया है। लेकिन भारत की कंपनी ने इसे अमेरिका में कमर्शियल लेवल पर लगाकर एक माइलस्टोन क्रिएट किया है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में Digital India के तहत इंटरनेट और कनेक्टिविटी में बड़ी प्रगति हुई है।
अब भारत की तकनीक अमेरिका जैसे देशों में भी अपनी जगह बना रही है।
Nav Wireless का यह कदम यह साबित करता है कि भारतीय स्टार्टअप्स और टेक कंपनियाँ अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं — बल्कि ग्लोबल स्टेज पर उतर चुकी हैं।
हर तकनीक की तरह LiFi के सामने भी कुछ चुनौतियाँ हैं:
👉 लेकिन जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी परिपक्व होगी, ये चुनौतियाँ घटेंगी।
भारत में LiFi को लेकर कई प्रयोग पहले से चल रहे हैं —
भारत की कंपनियाँ अब इसे विदेशों में भी लागू कर रही हैं। न्यूयॉर्क में हुई यह शुरुआत आने वाले समय में भारत को वैश्विक LiFi मार्केट में अग्रणी बना सकती है।
यह उपलब्धि सिर्फ एक तकनीकी इंस्टॉलेशन नहीं है —
👉 यह भारत के युवाओं, इंजीनियरों और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
👉 यह दिखाता है कि “Make in India” अब एक स्लोगन भर नहीं, बल्कि विश्व-स्तरीय वास्तविकता बन चुका है।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले 10 वर्षों में Wi-Fi और LiFi एक साथ मिलकर काम करेंगे।
👉 इससे इंटरनेट कनेक्टिविटी का एक नया युग शुरू होगा।
LiFi (Light Fidelity) एक वायरलेस डेटा ट्रांसमिशन तकनीक है जो रेडियो वेव्स की जगह LED लाइट्स के जरिए इंटरनेट सिग्नल भेजती है। Wi-Fi रेडियो तरंगों पर निर्भर होता है, जबकि LiFi दृश्यमान प्रकाश (visible light) का उपयोग करता है, जिससे स्पीड कई गुना बढ़ जाती है।
LiFi की स्पीड 1 Gbps से लेकर 224 Gbps तक पहुँच सकती है, जो Wi-Fi की तुलना में कई सौ गुना तेज़ है। यह उच्च डेटा ट्रांसफर रेट इसे भविष्य की इंटरनेट तकनीक बनाता है।
LiFi तकनीक का उपयोग एविएशन, हेल्थकेयर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन, स्कूलों, ऑफिसों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में किया जा सकता है। यह उन जगहों पर भी काम कर सकती है जहाँ रेडियो वेव्स प्रतिबंधित हैं।
कुछ भारतीय स्टार्टअप्स और संस्थान पहले ही LiFi ट्रायल कर रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले 2–3 वर्षों में यह तकनीक स्मार्ट सिटी और इंडस्ट्रियल ज़ोन में आम हो जाएगी।
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